सोमवार, 5 जनवरी 2015

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी छापेगी भारतीय साहित्य

हिन्दुस्तान वासियों के लिए यह खुशखबरी है कि दुनिया का जाना-माना हार्वर्ड विश्वविद्यालय भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहरों पर 500 किताबों की एक श्रृंखला प्रकाशित करने जा रहा है। इस काम में उनके साथ इन्फोसिस संस्थापक नारायण मूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति हैं। प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों में हर साल पांच किताबें छापी जाएंगी। पहली कड़ी में अकबर, सूरदास और मनु साहित्य समेत पांच पुस्तकें इसी माह लोकार्पित भी होने जा रही हैं। यह योजना वर्ष 2115 तक पूरी हो पाएगी। इस तरह श्रेष्ठ भारतीय साहित्य दुनिया के सामने द्विभाषा में पहुंचेगा और हमेशा के लिए संरक्षित और सुरक्षित रहेगा। अनुदित साहित्य में पद्य, गद्य, इतिहास, दर्शन, बौद्ध, मुस्लिम, हिन्दू ग्रंथ के अलावा और भी बहुत कुछ शामिल है।
2115 तक पूरी होगी योजना: इस योजना के तहत हर साल पांच नई पुस्तकें आएंगी। इस तरह यह योजना वर्ष 2115 तक पूरी हो पाएगी। पहली कड़ी में अकबर, सूरदास और मनु साहित्य समेत पांच पुस्तकें इसी माह लोकार्पित होने जा रही हैं। पुस्तकों का डिजिटलाइजेशन भी किया जाएगा। इस तरह श्रेष्ठ भारतीय साहित्य दुनिया के सामने द्विभाषा में पहुंचेगा और हमेशा के लिए संरक्षित और सुरक्षित रहेगा। अनुदित साहित्य में पद्य, गद्य, इतिहास, बौद्ध, मुस्लिम, हिन्दू ग्रंथ के अलावा और भी बहुत कुछ शामिल है।
हर पेज पर अंग्रेजी अनुवाद: जिन भाषाओं का साहित्य अंग्रेजी अनुवाद के साथ (द्विभाषा) पुस्तक के रूप में प्रकाशित होगा वे हैं- संस्कृत,  बांग्ला, हिन्दी, मराठी, पर्सियन, तमिल, तेलुगू, उर्दू आदि। पुस्तकों में मूल भाषा का एक पृष्ठ होगा, उसके सामने वाले पेज पर अंग्रेजी अनुवाद होगा।
हार्वर्ड का यह सबसे जटिल काम: हार्वर्ड ने भारतीय साहित्य छापने का जो बीड़ा उठाया है, वह कहीं अधिक वृहद, विविध और चुनौतीपूर्ण है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार हार्वर्ड का यह सबसे जटिल काम है।
ऐसा न तो पहले दुनिया ने देखा, न ही भारत ने
कुछ ऐसा होने जा रहा है जो इससे पहले न तो दुनिया ने देखा, न भारत ने ही देखा। विश्वसनीय, विशुद्ध और उत्कृष्ट ये पुस्तकें वास्तव में भारत इतिहास को दुनिया के सामने लाएंगी।
-शेल्डन पोलाक, जनरल एडिटर, मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया
इस माह ये पांच पुस्तकें आएंगी
1. द हिस्ट्री ऑफ अकबर खंड-1 : 2075 रुपये
2. द स्टोरी ऑफ मनु : 2075 रुपये
3. सूफी लिरिक्स : 1886 रुपये
4. सूर ओशन: पोयम्स फ्रॉम द अर्ली ट्रेडीशन : 2205 रुपये
5. थेरीगाथा: पोयम्स ऑफ फस्र्ट बुद्धिस्ट वुमेन : 1886 रुपये
रोहन मूर्ति तब हार्वर्ड में कंप्यूटर विज्ञान के छात्र थे
मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के जनरल एडिटर शेल्डन पोलाक पहले क्ले लाइब्रेरी में जनरल एडिटर थे। उन्होंने क्ले योजना के बीच में समाप्त होने पर संस्कृत के परे जाने के बारे में सोचा। उन्होंने इस पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की कार्यकारी संपादक शर्मिला सेन से बात की। शर्मिला ने नारायण मूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति से उनका परिचय कराया। तब रोहन हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान के छात्र थे। उनकी उम्र 26 साल थी। 2010 में रोहन ने नई लाइब्रेरी की स्थापना के लिए 52 लाख डॉलर दिए। शर्मिला के मुताबिक वास्तव में मैं और रोहन एक ही जैसे भारत में पढ़े हैं, जहां हम शेक्सपियर की रचनाएं अपने देश की उत्कृष्ट रचनाओं से ज्यादा जानते हैं।
-एजेंसी